इस साल भी इंडो-चाइना ट्रेड को हुआ आर्थिक घाटा सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी का हुआ नुकसान

कोरोना महामारी से हुआ इंडो-चाइना ट्रेड का आर्थिक नुकसान सैकड़ों परिवारों की रोजी रोटी पर आया संकट

इस साल भी इंडो-चाइना ट्रेड को हुआ आर्थिक घाटा सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी का हुआ नुकसान

कोरोना महामारी ने देश की आर्थिक स्तिथि को हिला कर रख दिया है और इसी महामारी के चलते इस साल भी इंडो-चाइना ट्रेड पर आर्थिक तंगी के बादल मंडरा रहे है। आंकड़ों के मुताबिक 30 साल में ऐसा पहली बार होगा जब भारतीय व्यापारी चीन की मंडी नहीं जा पाएंगे। वस्तु विनिमय के आधार पर होने वाला इंडो-चाइना ट्रेड जहां खुद में अनौखा व्यापार है, वहीं इससे सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी भी जुड़ी है। 

आमतौर पर इंडो-चाइना ट्रेड जून में शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार विदेश मंत्रालय से कोई निर्देश नहीं मिले हैं। डीएम आनंद स्वरूप ने बताया कि ट्रेड को लेकर अभी तक केद्र सरकार की ओर कोई दिशा निर्देश नहीं मिला है. ऐसे में तय है कि इस साल भी इंडो-चाइना ट्रेड नहीं होगा। भारतीय व्य़ापारी चीन की तकलाकोट मंडी से सामान के बदले अपनी जरूरत की चीजें लाते थे। 

चीन से लाए सामान के जरिए ही गुंजी और उसके आस-पास के गांवों की जरूरतें पूरी होती हैं। गुंजी भले ही भारत की सबसे बड़ी बॉर्डर मंडी हो, बावजूद इसके यहां का बाजार चीनी सामान से पटा रहता था। आलम ये था कि यहां भारत के सामान के मुकाबले चीनी सामान सस्ता मिलता है। यही नहीं तीन महीने तक होने वाले ट्रेड के दौरान गुंजी मंडी पूरी तरह आबाद भी रहती थी। लेकिन बार यहां हर तरफ सन्नाटा पसरा है। 


इंटरनेशनल ट्रेड के अनुसार इस व्यापार में लिपू पास से होने वाले इस ट्रेड में उच्च हिमालयी इलाकों के सैकड़ों व्यापारी शिरकत करते थे। ये व्यापारी घोड़े-खच्चरों से चीन तक अपना सामान पहुंचाते थे और इन्हीं की मदद से चीन से भी सामान लाते थे। हालाकिं भारत -चीन के बीच गड़बड़ाएं रिश्ते 1991 से 2019  तक इंडो-चाइना ट्रेड बदस्तूर जारी रहा साथ ही  व्यापारियों के लिए ये साल भी खराब निकला।