जानबूझ कर डॉक्टर लिख रहे है ब्रांडेड दवाएं, 70 प्रतिशत मरीज बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर

जहाँ महंगाई ने एक तरफ आम जनजीवन की कमर तोड़ रखी है वही दूसरी तरफ अस्पतालों के के भी नखरे उठाने पड़ रहे है

जानबूझ कर डॉक्टर लिख रहे है ब्रांडेड दवाएं, 70 प्रतिशत मरीज बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर

जहाँ महंगाई ने एक तरफ आम जनजीवन की कमर तोड़ रखी है वही दूसरी तरफ अस्पतालों के के भी नखरे उठाने पड़ रहे है। हम बता रहे है सोबन संघ जीना बेस अस्पताल की जहाँ नजारा ऐसा मिला की जीवन बचाने के लिए मरीजों को पहले महंगी दवाइयों से गुजरना पड़ रहा है। वही अस्पताल में दवाएं इतनी महंगी मिल रही है मरीजों के परिजनों को बहार से दवाएं खरीदनी पड़ रही है। 

वही इस महंगाई के मार की चोट उन लोगों पर सबसे ज्यादा लगी जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है वही ७० प्रतिशत मरीज बाहर से दवाएं खरीदने पर मजबूर है। इस अस्पताल में तकरीबन २८ ऐसे मरीज मिले जो बाहर से दवाएं खरीद रहे है। अपस्ताल से बाहर निकलते ही दर्जन भर से ज्यादा केमिस्ट की दुकानें है। वही डॉक्टर ब्रांडेड  दवाएं लिख देते है लेकिन बेस में ब्रांडेड दवाएं उपलब्ध ही नहीं होती।  

वही हल्द्वानी के गौरव मिश्रा ने बताया की उनके बच्चे के हाथ में खिंचाव आ गया था जिसमे डॉक्टरों ने तीन ब्रांडेड दवाएं लिखी थी लेकिन अस्पातल में केवल दो ही महंगाई दवाएं मिली वो भी दुगने दाम में बाकी की दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ी। वही त्वचा रोग, हड्डी रोग खांसी, मोतियाबिंद, मल्टीविटामिन, आदि दवाएं मरीज बाहर से खरीद रहे है अन्य मरीजों का कहना है की डॉक्टर जानबूझ कर महंगी दवाएं लिख रहे है।