क्या व्यर्थ गयी तीरथ की बलि ?

ममता बनर्जी बंगाल में उपचुनाव लड़ने जा रही है।  इस बहुप्रतीक्षित चुनाव का नतीजा ही तय करेगा की वह बंगाल में मुख्यमंत्री रह पायेगी की नहीं।

क्या व्यर्थ गयी तीरथ की बलि ?

ममता बनर्जी बंगाल में उपचुनाव लड़ने जा रही है।  इस बहुप्रतीक्षित चुनाव का नतीजा ही तय करेगा की वह बंगाल में मुख्यमंत्री रह पायेगी की नहीं। ममता बनर्जी ने 30 सितंबर को भवानीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए पिछले शुक्रवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

चुनाव टलने की थी संभावना 

कोरोना की दूसरी लहर के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने सीधे सीधे चुनाव आयोग को कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार ठहराया था इसलिए माना जा रहा था की बंगाल में उपचुनाव टाले जा सकते पर अब आयोग ने इन उपचुनावों की घोषणा कर दी है।  नंदीग्राम से चुनाव हरने के बाद ममता बनर्जी को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में बने रहने के लिए संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप 5 नवंबर तक राज्य विधानसभा में एक सीट जीतना आवश्यक है।

कुछ ऐसा ही था उत्तराखंड का भी हाल 

कुछ ऐसा ही किस्सा उत्तरखंड में भी देखने को मिला था जब 57 विधायक होने के बावजूद भाजपा ने राज्य की कमान गढ़वाल से सांसद तीरथ सिंह रावत को सौपी थी। संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप रावत को भी 10 सितंबर तक विधायक के रूप में चुना जाना था पर भाजपा हाई कमान ने उपचुनावों में जाने की अपेक्षा एक युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को राज्य की कमान देना बेहतर समझा। उस समय भी यह बदलाव करते हुए संवैधानिक संकट का हवाला दिया गया था।  

कहा यहाँ तक गया की ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बनने से रोखने के लिए ऐसा किया जा रहा है अब जब ममता उपचुनाव लड़ने जा रही है तो यह सवाल उठना लाजमी है की क्या तीरथ की बलि व्यर्थ गयी ?