पुण्यतिथि: वैज्ञानिक से लेकर राष्ट्रपति तक जब 30 मिनट के लिए बने थे कलाम पायलट

मिसाइल मैन के नाम पूरी दुनिया में जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम हमारे बीच है लेकिन उनके कार्य और उनके विचार हम सबकों प्रेरित करते आ रहे है

पुण्यतिथि: वैज्ञानिक से लेकर राष्ट्रपति तक जब 30 मिनट के लिए बने थे कलाम पायलट

मिसाइल मैन के नाम पूरी दुनिया में जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके कार्य और उनके विचार हम सबकों प्रेरित करते आ रहे है। वर्ष 2015 में शिलॉन्ग के विश्विद्यालय में कलाम साहब छात्रों को सम्बोधित करने पहुंचे थे अचानक दिल का दौरा पड़ने से कलाम साहब का निधन हो गया था 83 वर्षीय कलाम ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 


एपीजे अब्दुल कलाम भारत के उन रत्न में से थे जो ना सिर्फ एक सफल वैज्ञानिक बल्कि भारत के 11वे राष्ट्रपति भी रहे। बुलंदियों के शिखर पर पहुंचने के बाद भी कलाम साहब बिल्कुल जमीन से जुड़े हुए थे वे एकदम साधारण व्यक्ति की तरह थे। कलाम का साहब का जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। उनका बचपन बेहद आभाव में बिता लेकिन कलाम साहब पढ़ाई में बहुत होशियार थे। 

कलाम साहब का बचपन का नाम अबुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था उनका पूरा पालन पोषण तमिलनाडु में हुआ उन्होंने श्वार्ट्ज हायर सेकेंडरी स्कूल, रामनाथपुरम से स्कूली शिक्षा पूरी की। उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज से भौतिकी में स्नातक किया। फिर उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

कलाम साहब एयरफोर्स में जाना चाहते थे लेकिन नौवें स्थान पर आकर भी कलाम साहब चयन में चूक गए। हालाकिं चयन ना होने से कलाम साहब का दिल और सपना टूट गया था लेकिन कलाम साहब ने हिम्मत नहीं हारी और मद्रास के इंजीनियरिंग ऐरोनॉटिक्स की पढ़ाई की। वर्ष 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरों में नौकरी करना शुरू कर दिया। 

कलाम साहब के निर्देशन पर उन्होंने व उनके साथियों ने मिलकर अपना पहला स्वदेशी पीएसएवी-3 बनाया और 1980 में पहला उपग्रह रोहिणी अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था। इसके बाद कलाम साहब ने मिसाइल टेक्नोलॉजी पर खूब काम किया। जिसके बाद भारत में कलाम साहब मिसाइल मैन के नाम से जाने गए। कलाम साहब ने सबसे पहले मिसाइल पृथ्वी फिर अग्नि को बनाने में एहम योगदान दिया। 

भारत रत्न पुरस्कार से नवाजे गए एपीजे अब्दुल कलाम कठिन से कठिन काम को भी आसानी से हल करना सिखाते थे। एक बार कलाम साहब रॉकेट विज्ञान को समझाने के लिए रॉकेट स्कूली बच्चों के बीच ले गए थे। बेहद आसान शब्दों में कलाम साहब ने रॉकेट विज्ञान समझाया था। वही कलाम साहब वर्ष 1992 से लेकर 1999 तक वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे। 

कलाम साहब भारत के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जिनका कोई राजनैतिक जीवन नहीं था। साल 2002 में जब पूर्व राष्ट्रपति आर.नारायण का कार्यकाल खत्म हो रहा था उस दौरान समजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने एपीजे अब्दुल कलाम का नाम प्रस्ताव दिया। कांग्रेस पार्टी इस प्रस्ताव को ख़ारिज ना कर पाई और कलाम साहब बन गए राष्ट्रपति। 

कलाम साहब ने जिंदगी में सबकुछ हासिल कर लिया था लेकिन इनकी फाइटर प्लेन उड़ाने की तमन्ना रह गई थी। फिर साल 2006 में एक दिन यह सपना उनका पूरा हो गया कलाम साहब ने देश के एडवांस फाइटर प्लेन को बतौर को-पॉयलट के रूप में महज 30 मिनट के लिए उड़ाया था। साल 2007 में कलाम साहब ने अपना राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा कर लिया था। इसके बाद कलाम साहब कई सारी गतिविधियों का हिस्सा रहे 27 जुलाई 2015 में कलाम साहब ने दुनिया को अलविदा कह दिया।