कोर्ट ने हरमीत को करारा दोषी, हो सकती है फांसी, परिवार के चार लोगों की थी नृशंस हत्या

देहरादून: अपराध के सात साल बाद अपर जिला न्यायाधीश (5वें) आशुतोष मिश्रा की अदालत ने एक व्यक्ति को उसके परिवार के चार सदस्यों की हत्या का दोषी करार दिया है

कोर्ट ने हरमीत को करारा दोषी,  हो सकती है फांसी, परिवार के चार लोगों की थी नृशंस हत्या

देहरादून: अपराध के सात साल बाद अपर जिला न्यायाधीश (5वें) आशुतोष मिश्रा की अदालत ने एक व्यक्ति को उसके परिवार के चार सदस्यों की हत्या का दोषी करार दिया है। अदालत मंगलवार को सजा का ऐलान कर सकती है। चकराता रोड स्थित आदर्शनगर के रहने वाले हरमीत सिंह ने अक्टूबर 2014 में दिवाली की रात को वारदात को अंजाम दिया था। उस समय उसकी उम्र 21 साल थी और वह नशे का आदी था। सोमवार को सिंह को नृशंस हत्याओं के लिए दोषी पाया गया था। उन्होंने अपने पिता जय सिंह (65), जो एक आउटडोर विज्ञापन व्यवसाय चलाते थे, उनकी सौतेली मां कुलवंत कौर (55), उनकी गर्भवती सौतेली बहन (25) और उनकी भतीजी सुखमनी (3) की हत्या कर दी थी। हरमीत का सात वर्षीय भतीजा कवल सिंह, जो उस रात भी मौजूद था, छिपकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहा। बाद में वह 21 अन्य लोगों के साथ इस मामले में मुख्य गवाह बना।


क्या हुआ था दिवाली की रात 

साल 2014 को जब पूरा परिवार दिवाली मानाने के बाद अपने अपने कमरे में सोने के लिए चला गया। वही हरप्रीत ताक लगाए बैठा था की घरवाले सो गए या नहीं। हरमीत  पुरे परिवार के सोने का इन्तजार करता रहा। इसके बाद जब हरमीत को लगा की सब गहरी नींद में है उसने मौके का फायदा उठाते हुए अपने पिता और सौतेली माँ को चाक़ू से गोदा इसके बाद दूसरे कमरे में हरजीत कौर सुखमणि को मौत के घाट उतारा। जब पांच साल के कंवलजीत ने हत्या होते देखा तो उसने वहां से भागने का प्रयास किया लेकिन हरप्रीत ने कंवलजीत के हाथ में चाक़ू से वार किया लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया। 


सम्पति के लिए किया था कत्ल 

हरमीत ने इस हत्याकांड को अंजाम प्रॉपर्टी के लिए दिया था। वही कोर्ट इस अभियोजन को साबित भी किया। दरअसल कारोबारी जय सिंह की पहली पत्नी से दो बेटे थे हरमीत और पारस। पारस अपनी माँ के साथ रहता था क्यूंकि जय सिंह की पहली पत्नी ने तलाक ले लिया था। वही जय के भाई अजीत सिंह ने अपनी बेटी बहुत पहले जय सिंह को गोद दे दी थी। वही अजीत ने बताया की हरमीत पहले भी जय सिंह को जान से मरने की धमकी दे चूका था। क्यूंकि हरमीत की पूरी नजर प्रॉपर्टी पर थी। लेकिन इस नृशंस हत्या के बाद हरमीत ने खुद को मानसिक तौर पर बीमार बताया था लेकिन जाँच में यह दावा गलत पाया गया। 


हत्या से पहले लगवाई थी चाक़ू में धार 

हत्या के इरादे से हरमीत ने एक दिन पहले चाक़ू में धार करवाई थी। वही उसने अंसारी मार्ग पर एक कारीगर से चाक़ू में धार लगवाई थी। कारीगर ने कोर्ट में हरमीत को पहचाना और बताया की किस तरह से उसके जिद्द करने पर चाक़ू में धार किया था। वही घर में आने वाली नौकरानी ने भी कोर्ट में अपना बयान दिया की जब वह हमेशा की तरह घर में काम करने पहुंची तो हरमीत कहा की आज जाओ आज काम नहीं करवाना है लेकिन जैसे नौकरानी राजी अंदर गई अंदर का माहौल देखते ही चिल्ला उठी और घर से बाहर की ओर भाग निकली। 

हरमीत को फांसी 

वही जय सिंह के भाई अजीत सिंह ने हरमीत के लिए फांसी की मांग की है उनका कहना है की जब तक हामीत को फांसी नहीं होगी मेरे परिवार की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। मैंने सात साल तक उस घर को देखकर रोया हूँ।