चाचा को मानाने पहुंचे चिराग पासवान, आधे घंटे बाद खुले चाचा के घर के दरवाजे

बिहार की राजनीती में पारिवारिक अनबन सियासी तूल पकड़ती नजर आई

चाचा को मानाने पहुंचे चिराग पासवान, आधे घंटे बाद खुले चाचा के घर के दरवाजे

बिहार की राजनीती में पारिवारिक अनबन सियासी तूल पकड़ती नजर आई। युवा नेता चिराग पासवान पर उनके चाचा समेत पांच सांसद उनके ऊपर भारी पड़ गए है। बता दे की दिवंगत दिग्गज नेता रामविलास पासवान के जाने के बाद उनकी लोक जनशक्ति पार्टी अब (लोजपा) टूट गई है वहीं लोजपा के पांचों सांसदों ने चिराग पासवान को पार्टी के संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया है और उनके बागी चाचा पशुपति पारस पासवान को नया नेता चुना है।

अपने चाचा की नाराजगी भांपते हुए चिराग अपने चाचा पशुपति पारस को मानाने उनके घर पहुंच गए। लेकिन भतीजे के लिए चाचा के दिल में इतनी खटास दिखी की चिराग के लिए घर के दरवाजे नहीं खोले गए। चिराग पासवान घर के बाहर ही अपनी गाड़ी में बैठकर करीब 20 मिनट तक इंतजार करते रहे। इसके बाद घर का दरवाजा खोला गया। 


मैंने पार्टी तोड़ी नहीं बचाई है 

सोमवार को हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में पशुपति पासवान ने कहा की कि हमारे भाई चले गए, हम बहुत अकेला महसूस कर रहे हैं। भाई के जाने के बाद पार्टी की बागडोर जिनके हाथ में गई, तब सभी को उम्मीद थी कि वर्ष 2014 की तरह इस बार भी हम एनडीए के साथ बने रहें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोक जनशक्ति पार्टी बिखर रही थी, असमाजिक तत्व आ रहे थे, एनडीए से गठबंधन को तोड़ दिया और कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी गई। उन्होंने पार्टी को तोड़ा नहीं बचाया है। साथ ही कहा कि उन्हें चिराग पासवान से कोई नाराजगी नहीं है, अगर वे चाहें तो पार्टी में रह सकते हैं। मैंने पार्टी तोड़ी नहीं है, पार्टी को बचाया है। जब तक मैं जिंदा हूं, पार्टी को जिंदा रखूंगा।