चाइल्ड सेक्स रेशो: जारी हुए आंकड़ों से उत्तराखंड को बताया फिसड्डी उत्तराखंड ने जताया विरोध

चाइल्ड सेक्स रेशो में नीति आयोग द्वारा जारी किए गए 840 आंकड़ों में उत्तराखंड को फिसड्डी राज्य बताया वहीं केरल को सबसे बेहतर

चाइल्ड सेक्स रेशो:  जारी हुए आंकड़ों से उत्तराखंड को बताया फिसड्डी उत्तराखंड ने जताया  विरोध

शिशुओं के जन्म पर लिंग अनुपात के मुद्दे पर उत्तराखंड बनाम नीति आयोग के बीच बहस जारी है। इस महीने के शुरू में नीति आयोग एसडीजी इंडेक्स जारी करते हुए सेक्स रेशो के मामले में केरल को सबसे बेहतर और उत्तराखंड को सबसे फिसड्डी राज्य कहकर रेशो 840 बताया था। लेकिन उत्तराखंड सरकार ने इस रिपोर्ट पर असहमति जताते हुए इस रिपोर्ट को गलत बताया है। उत्तराखंड ने अपने हिसाब जारी किए गए आंकडों के मुताबिक 949 बताया है। वहीं सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के डेटा में कहा गया है कि राज्य में सेक्स रेशो 960 है यानी यह केरल से भी ज़्यादा है। 

सीआरएस के इस जारी हुए आंकड़े से विवाद की स्तिथि उत्पन्न हो गई। उत्तराखंड सरकार ने तत्काल जारी हुए आंकड़े को अपने दावे के प्रमाण के तौर पर प्रचारित करने की रणनीति भी अपनाई। टीओआई की एक रिपोर्ट की मानें तो उत्तराखंड की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने कहा, 'मुझे नीति आयोग की रिपोर्ट को लेकर संशय थे। अब, सीआरएस डेटा ने साबित कर दिया है कि सेक्स रेशो के मामले में उत्तराखंड सबसे बेहतरीन राज्यों में है.'

109 संख्या के अंतर में सवाल उठता है की आखिर कैसे इतना फर्क पैदा हो सकता है। यहां दो बातें ध्यान देने की हैं। एक तो किस प्रक्रिया से नंबर जुटाए जाते हैं और दूसरी यह कि कैसे नंबरों का औसत निकाला जाता है. नीति आयोग का एसडीजी इंडेक्स केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय से तैयार किया जाता है, जो ​संबंधित मंत्रालयों से मिले ताज़ा डेटा पर आधारित होता है। वहीं, उत्तराखंड सरकार सेक्स रेशो के मामले में आशा और एएनएम वर्करों के सर्वे को आधार मानकर आंकड़े तैयार करती है। 

क्या कहता है सीआरएस डेटा 

सीआरएस डेटा की बात की जाए तो यह एएनएम और आशा वर्करों के सर्वे पर नहीं बल्कि शिशुओं के जन्म के पंजीकरण पर आधारित होता है। अब यहां ध्यान देने की बात यह है कि उत्तराखंड में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेक्स रेशो को लेकर बड़ी खाई देखी जा चुकी है. 2015-16 में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे में बताया गया था कि उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों में शिशु सेक्स रेशो 858 था, तो ग्रामीण क्षेत्रों में 948 सीआरएस ने ताज़ा डेटा ​का विश्लेषण करते हुए कहा है कि इस बार भी ग्रामीण इलाकों में रेशो 990 देखा गया, जबकि शहरी इलाकों में 929. बहरहाल, अब इस आंकड़ेबाज़ी में नीति आयोग की तरफ से जवाब बाकी है. न्यूज़ 18 ने सेक्स रेशो के मामले में लगातार अपडेट करते हुए आपको बताया था कि उत्तराखंड सरकार ने अपनी आपत्तियों को लेकर नीति आयोग से लिखित में बातचीत की थी।