भारत आए चीते जानिए क्या है आखिरी चीते की कहानी और क्या है चीतों की विलुप्ति का कारण

अब ये तो आप सब जानते है की 8 चीते भारत लाये गए है मगर क्या आपको इसके पीछे की पूरी कहानी पता है की आखरी बार चीते कब देखे गए थे?

भारत आए चीते जानिए क्या है आखिरी चीते की कहानी और क्या है चीतों की विलुप्ति का कारण
आज प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जन्मदिन पर पूरे भारतवर्ष को तौह्फे में भारत से विलुप्त चीतों को लौटाया है, विलुप्त होने के 70 से अधिक वर्षों के बाद देश में एक बार फिर तेज़ रफ़्तार चीते दौडते दिखाई देंगे, जी हा देश में सात दशक बाद आज से फिर चीता युग की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीतों को कूनो अभयारण्य के क्वारंटाइन बाड़े में छोड़ दिया है। इसके पहले इन्हें नामीबिया से विशेष विमान से ग्वालियर लाया गया था और वहां से चीनूक हेलिकाप्टर के द्वारा कूनो पहुंचाया गया। 

अब ये तो आप सब जानते है की 8 चीते भारत लाये गए है मगर क्या आपको इसके पीछे की पूरी कहानी पता है की आखरी बार चीते कब देखे गए थे? आखरी चीता कहा देखा गया था? भारत में कब ये घोषणा हुई की चीतों की प्रजाति विलुप्त हो चुकी है? ऐसी क्या वजह रही की भारत से चीते गायब होते गए?भारत में फिर से चीतों को वापस लाने की प्रक्रिया कब शुरू हुई?
नहीं तो आइये आपको बताते है........

क्या है आखिरी चीता की कहानी?
बताया जाता है कि साल 1947 में कोरिया जिसे वर्तमान में छत्तीसगढ़ के नाम से जाना जाता है कोरिया रियासत के महाराज रामनुज प्रताप सिंह देव शिकार के बहुत शौकीन थे उन्होंने अपने जीवन काल में कई बाघ, तेंदुए, हिरण, बारहसिंघा जैसे अनेक प्रकार के जानवरों का शिकार किया था जिस की गवाही आज भी बैकुंठपुर के भव्य रामनुज पैलेस की दीवारों देती  हैं. साल 1947 में महाराज राम अनुज प्रताप सिंह को गांव में एक जंगली जानवर के हमले की बात पता चली ग्रामीणों ने आदमखोर जंगली जानवर की शिकायत महाराज से की जिसके बाद महाराज शिकार के लिए निकल पड़े और उन्होंने एक साथ तीन चीतों  को मार गिराया और परंपरा के अनुसार महाराज ने तीनों चीतों  के साथ बंदूक लिए फोटो खिंचवाई तीन चीतों के शिकार की यह तस्वीर बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के पास आज भी जमा है माना जाता है कि यह तीन चीते भारत के आखिरी चीते थे और उसके बाद भारत में कभी चीते नहीं देखे गए. 5 साल बाद 1952 में भारत से चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया और उसके बाद से भारत में कोई चीता नहीं है.

चीतों की विलुप्ति का कारण:
1-चीतों की विलुप्ति के दो विशेष कारण थे। पहला- जानवरों के शिकार के लिये चीता को पालतू बनाया जाना तथा दूसरा- कैद में रहने पर चीता प्रजनन नहीं करते।
2-अपनी तेज़ गति तथा बाघ व शेर की तुलना में कम हिंसक होने की वजह से इसको पालना आसान था। तत्कालीन राजाओं और ज़मीदारों द्वारा इसका प्रयोग अक्सर शिकार के लिये होता था जिसमें ये अन्य जानवरों को पकड़ने में उनकी मदद करते थे।
3-चीते को पालने का मुख्य कारण इनका सहज स्वभाव था और ये कुत्तों की भाँति आसानी से पाले जा सकते थे। बाघ, शेर तथा तेंदुए के विपरीत यह कम उग्र जानवर है।
4-ऐसा कहा जाता है कि मुगल बादशाह अकबर ने 49 वर्षों के शासनकाल के दौरान अपने शाही चिड़ियाघर में लगभग 9000 चीते रखे थे।

भारत में फिर से चीतों को वापस लाने की प्रक्रिया कब शुरू हुई?
बात 1970 के दशक की है. चीतों के विलुप्तह होने के बाद भारत सरकार ने इन्हेंा पहले ईरान से लाने पर विचार किया था. ईरानी चीतों के जेनेटिक्स अफ्रीकी चीतों जैसे होते हैं. ईरान इसके लिए राजी भी था, लेकिन उसने भारत के सामने एक शर्त रख दी. ईरान ने चीतों के बदले में भारतीय शेर मांगे थे, जिसके चलते भारत ने अपना फैसला बदल दिया.जिसके बाद साल 2009 में देश में चीतों को लाने की कोशिशें नए सिरे से शुरू हईं। इसके लिए 'अफ्रीकन चीता इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट इन इंडिया’ प्रोजेक्ट शुरू किया गया। 2010 से 2012 के दौरान देश के दस वन्य अभयारण्यों का सर्वेक्षण किया गया। इसके बाद मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क को चीतों के लिए चयनित किया गया।  इस पूरी कवायद में  2021-22 से 2025-26 तक के लिए 38.70 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है

अब सवाल ये खड़ा होता है की चीता भारत में सर्वाइव कर पाएंगे या नहीं और चीतों  के लिए 
कूनो नेशनल पार्क को ही क्यों चुना गया ?
चीतों के रहने के हिसाब से कूनो नेशनल पार्क को  बेहतर जगह माने जाने की सबसे बड़ी वजह ये थी, कि यहां के जंगलों में इंसानों की आबादी बेहद कम है. डकैतों के डर से यहां के लोग बाहर की ओर जाकर बसे हैं. इसके अलावा यहां पहले से करीब 200 सांभर, चीतल व अन्य जानवरों को लाकर बसाया गया है. अब इस क्षेत्र में चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सुअर, चिंकारा, चौसिंघा, ब्लैक बक, ग्रे लंगूर, लाल मुंह वाले बंदर, शाही, भालू, सियार, लकड़बग्घे, ग्रे भेड़िये, गोल्डेन सियार, बिल्लियां, मंगूज जैसे कई जीव मौजूद हैं. चीते इनका आसानी से शिकार कर सकते हैं. उनके लिए यहां खाने-पीने के लिए कोई कमी नहीं होगी और वो आसानी से सर्वाइव कर पाएंगे.हा यहां के वातावरण के हिसाब से रहने में उन्हें थोड़ी मुश्किल हो सकती है.

चीतों के बारे में रोचक तथ्य –
1- चीते 1 मिनट में करते हैं शिकार
2-अधिकतम गति से 450 मीटर दूर तक ही दौड़ सकते हैं चीते
3-दौड़ने के दौरान चीते के शरीर का तापमान करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है।
4-चीते का दिमाग बढ़ी हुई गर्मी को नहीं झेल पाता और वह अचानक दौड़ना बंद कर देता है।
5-1 मिनट तक ही शिकार का पीछा करता है नहीं मार पाता तो पीछा छोड़ देता है।
सरकार की इस पहल से ये कयास लगाया जा रहा है की भारत में अब जल्द ही फिर से चीतों की प्रजाति बढती हुई दिखाई देगी.