भारत की पहली ट्रांसजेंडर बनी फोटो जर्नलिस्ट भीख मांग कर ख़रीदा था कैमरा: जोया थॉमस

जोया थॉमस लोबो भारत की पहली ट्रांस फोटो जर्नलिस्ट बनी उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़े उन हालातों को जिक्र किया है की वह किस तरह बाधाओं को पार करते हुए एक ट्रांसजेंडर जर्नलिस्ट बनी

भारत की पहली ट्रांसजेंडर बनी फोटो जर्नलिस्ट भीख मांग कर ख़रीदा था कैमरा: जोया थॉमस

कहते है जिंदगी में कुछ करने के लिए हौसला बड़ी चीज होती है फिर आप एक स्त्री हो पुरुष हो या ट्रांसजेंडर इसका भेदभाव आपकी कामयाबी कभी नहीं करती। और इसी कथन को पूरा करते हुए जोया थॉमस लोबो ने भारत की पहली ट्रांसजेंडर फोटो जर्नलिस्ट बनी है। उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़े उन हालातों को जिक्र किया है की वह किस तरह बाधाओं को पार करते हुए एक ट्रांसजेंडर जर्नलिस्ट बनी।  

जोया थॉमस  मुंबई के बांद्रा वेस्ट की रहने वाली है जोया अपने माता पिता के साथ रहती थी उस वक़्त जोया के पिता चौकीदारी करते थे। जोया ने कान्वेंट स्कूल में पांचवी क्लास तक पढ़ाई की। फिर जोया ने बहुत कम उम्र में अपने पिता को खो दिया उसके बाद जोया की माँ ने जोया और उनकी बहन को पाला। पिता की मृत्यु के चलते जोया को अपना घर छोड़ना पड़ा। मुश्किल हालातों के चलते जोया ने एक बेकरी में नौकरी करना शुरू कर दिया। 

लेकिन जोया जब तक छोटी थी तब तक उन्हें अपना जीवन समान्य लगा जैसे ही जोया 17 साल की हुई जोया में शारीरिक बदलाव होने लगे जोया इस बारे में बात करने से हिचकिचाती थी। लेकिन जैसे ही यह सच्चाई सामने आ गई तब जोया अपने गुरु से मिली जोया के गुरु ने अपने ट्रांसजेंडर समूह से मिलवाया जहां जोया ने तालीम ली उनकी भाषा, किस तरह से ताली बजाते है आदि तालीम लेने के बाद जोया ने ट्रेनों में भीख मांगने लगी। 

जोया ने अपने जीवन को यही तक सिमित नहीं समझा। उनके मन में कुछ और चल रहा था कुछ हट के कुछ अलग। उनके मन में कैमरा खरीदने का ख़्याल चल रहा था। इसके बाद जोया ने पैसे इकट्ठा किए और एक कैमरा ख़रीदा इसके बाद जोया फोटोग्राफी करने लगी हालाकिं जोया में कुछ करने का हुनर था लेकिन जरूरत थी थोड़ी पॉलिशिंग की और वह इसी क्षेत्र में खुद से सीखती रही। 

लेकिन जब जोया की माँ को जोया के भीख मांगने और ट्रांसजेंडर समूह का पता चला उस वक़्त जोया की माँ को बहुत बुरा लगा। उनकी माँ को जोया की चिंता सताने लगी उन्हें लगा कहीं जोया यौनकर्म में फंस के ना रह जाए तब उस वक़्त जोया ने अपनी माँ की चिंता को दूर करते हुए  कहा की वह मर जाएंगी लेकिन कभी अपना तन नहीं बेचेंगी। इसके बाद जोया की माँ ने जोया पर भरोसा कर लिया लेकिन माँ के निधन के बाद जोया ने भीख मांगना और ट्रांसजेंडर समूह में जाना छोड़ दिया। 

फिर एक दिन जोया की जिंदगी में सुबह की एक किरण ने दस्तक दी जोया अपने ख़रीदे हुए कैमरे से बारीकियां सिख रही थी उसी वक़्त उन्हें डोक्युमेंट्री फिल्म ऑफर हुई। जोया की यह पहली कामयाबी थी की जोया को इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए सम्मानित किया गया फिर कुछ दिनों बाद एक अखबार के मालिक ने जोया को एक फ्रीलांसर के तौर पर रख लिया और तस्वीरें खींचने को कहा गया। 

वही हुनर और कुछ करने के जज्बे को लेकर जोया आगे बढ़ती चली गई जोया की तस्वीरों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने जोया की तस्वीरों को जगह दी। जोया  संघर्ष के साथ अभी भी बतौर फोटो जर्नलिस्ट के लिए नौकरी तलाश कर रही है साथ वर्तमान में जोया स्वतन्त्र तौर पर काम कर रही है उनकी यही पहचान अब उनकी आजीविका का साधन है।