आजाद जब तक जिए आजाद रहे, उन्हें कोई कैद नहीं कर पाया

चंद्रशेखर आजाद महान क्रांतिकारी की 115वी जयंती मनाई जा रही है चंद्र शेखर उन क्रांतिकारी में से थे जिन्हे कोई कैद नहीं कर सका

आजाद जब तक जिए आजाद रहे, उन्हें कोई कैद नहीं कर पाया

"मेरा नाम आजाद और पिता का नाम स्वतंत्रता और मेरा पता जेल है" अपना ये परिचय उस वक़्त चंद्रशेखर आजाद ने दिया था जब अंग्रेजों ने उनको असहयोग आंदोलन के समय गिरफ्तार किया था। आज पुरे भारत वर्ष में चंद्र शेखर आजाद की जयंती मनाई जा रही है। चंद्र शेखर उन क्रांतिकारी में से थे जिन्हे कोई कैद नहीं कर सका। वहीं इस महान क्रांतिकारी की 115वी जयंती मनाई जा रही है। 

23 जुलाई को हुआ था जन्म 

आजाद के पिता सीताराम तिवारी उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिला के बदर गांव के रहने वाले थे। भीषण अकाल के चलते आजाद का पूरा परिवार आदिवासी गांव भाबरा आ बसा और फिर 1906 तेईस जुलाई को आजाद का यही जन्म हुआ। उनका प्रारंभिक जीवन इसी गांव में गुजरा। यहीं पर उन्‍होंने धनुष-बाण चलाना सीखा। बचपन में आजाद महात्मा गांधी से काफी प्रभावित थे। दिसंबर 1921 में जब गांधी जी के असहयोग आंदोलन का आरम्भिक दौर था, उस समय महज 14 वर्ष की आयु में चंद्रशेखर इस आंदोलन का हिस्‍सा बन गए थे। 

जब डैकेती को दिया था अंजाम 

इतिहास के पन्ने पलट के देखे जाए तो आजाद ने 9 अगस्त 1925 में अंग्रेजों को हिला कर रख दिया था। शाम का समय हल्का अंधेरा छाने लगा था। लखनऊ की तरफ सहारनपुर पैसेंजर एक्सप्रेस आगे बढ़ रही थी। लखनऊ से पहले ही काकोरी स्टेशन पर 10 क्रांतिकारी सवार हुए और ट्रेन को लूट लिया। इस घटना को अंजाम चंद्रशेखर व रामप्रसाद बिस्मिल ने दिया था। 

इलाहबाद में मारी थी खुद को गोली 

फिर वो दौर आया जब चंद्र शेखर आजाद लाला लाजपत राय की मौत का बदला जेपी सांडर्स और उनके अंगरक्षक लेने के बाद आजाद भागे भागे फिर रहे थे। इस बदले में क्रन्तिकारी भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव भी शामिल थे। आजाद ने किसी तरह से भगत सिंह और राजगुरु को वहां से निकालने में सफल रहें। 27 फरवरी 1931 आजाद के मित्र सुखदेव राज ने इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में मिलने को बुलाया वो दोनों बात कर ही रहें थे तभी अंग्रेज सैनिकों की चंद टुकड़ी ने आजाद को घेर लिया। 

आजाद पर ताबड़ तोड़ गोलियां बरसाने लगे लेकिन आजाद की भी जिद्द थी की इन गोरों के हाथ आकर कभी कैदी नहीं बनुगा। इसलिए उन्होंने खुद को गोली मार ली. जिस पार्क में उनका निधन हुआ था आजादी के बाद इलाहाबाद के उस पार्क का नाम बदलकर चंद्रशेखर आजाद पार्क और मध्य प्रदेश के जिस गांव में वह रहे थे उसका नाम बदलकर आजादपुरा रखा गया।