वीरांगना तीलू रौतेली की जयंती पर आँगनबाड़ी कार्यकत्रियों को पुरस्कार से किया सम्मानित

महिला सशक्तिकरण बाल बाल विकास की ओर से आयोजित तीलू रौतेली पुरस्कार समारोह में बतोर मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

वीरांगना तीलू रौतेली की जयंती पर आँगनबाड़ी कार्यकत्रियों को पुरस्कार से किया सम्मानित

महिला सशक्तिकरण बाल बाल विकास की ओर से आयोजित तीलू रौतेली पुरस्कार समारोह में बतोर मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहुंचे। तीलू रौतेली के जयंती के इस ख़ास अवसर पर सीएम धामी व महिला बाल विभाग सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्य संग आँगनबाड़ी कार्यकत्रियों महिलाओं को "तीलू रौतेली" पुरस्कार से सम्मानित कर उन्हें नवाजा गया। 

इस अवसर पर सीएम ने कहा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने कोविड-19 विभाग की योजनाओं को लोगों तक पंहुचाने का काम किया है। महिला बाल सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि आज का दिन बेहतरीन है साथ ही उनहोंने कहा कि आज 23 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार से नवाजा गया है और आगनबाड़ी  से 22 कार्यकत्रियों को भी सम्मानित किया गया है। 

वीरांगना तीलू जी के जयंती पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों सुनहरा अवसर भी मिला है। अब तक जो धनराशि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और तीलू रौतेली पुरस्कार लेने वाली महिलाओं को मिलती थी उस धनराशि बढाने का काम किया है। रेखा आर्य ने कहा 2022 मे आंगनबाड़ी और तीलू रौतेली पुरस्कार लेने वाली महिलाओं की धनराशि को 51हजार कर दिया जाएगा। बता दे की हॉकी खिलाड़ी वंदना कटरिया को महिला सशक्तिकरण के विभाग की ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है। 


कौन है वीरांगना तीलू रौतेली 

गढ़वाल में झांसी की रानी के नाम से जाने वाली तीलू रौतेली का जन्म 1661 में तल्ला गुराड़ चौंदकोट पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। गढ़वाल की रियासत के राजा फतेहशाह के सेनापति भुप्पु रावत की बेटी थी तीलू रौतेली। तीलू के दो बड़े भाई भी थे पत्वा और भक्तु। तीलू की सगाई उसके बाल्यकाल में सेनापति भवानी सिंह से हो गई थी। तीलू को बचपन से तलवारबाजी का करने का शौक था उन्होंने अपने गुरु शिबु पोखरियाल से तलवारबाजी और घुड़सवारी सीखा। होनहार तीलू ने बचपन में ही अपनी पसंद का घोड़ा "बिंदुली" को चुन लिया था। 

वही महज पंद्रह साल की उम्र में तीलू ने कत्यूर जो (कुमाऊं के राजा) आक्रांताओं की सेना के खिलाफ युद्ध का बिगुल फूंख दिया था। सात साल तक तीलू कत्यूर के साथ युद्ध करती रही और अपना लोहा मनवा कर कत्यूर अपनी वीरभूमि में पराजित करने में सक्षम रही। तीलू रौतेली कर जन्मदिवस के उपलक्ष्य में संस्कृत महोत्सव मनाया जाता है। वही कुछ लोग इस अवसर पर पेड़ लगाते है।