दुर्गन्ध और गंदगी बीच चल रहा आगनबाड़ी केंद्र

पूरी दीवार पर जमी काई और सीलन, आसपास गंदगी का अम्बार और पेड़ों की टहनियों ढका दुर्गन्ध भर आगनबाड़ी केंद्र

दुर्गन्ध और गंदगी बीच चल रहा आगनबाड़ी केंद्र

पूरी दीवार पर जमी काई और सीलन, आसपास गंदगी का अम्बार और पेड़ों की टहनियों ढका दुर्गन्ध भर आगनबाड़ी  केंद्र। यह हालत कही और नहीं बल्कि राजधानी देहरादून के न्यू पटेल नगर की थी । जहाँ किराए के भवन पर आगनबाड़ी केंद्र का संचालन हो रहा है। इस आगनबाड़ी की हालत इतनी ख़राब थी की यहाँ बहार तो दूर अंदर बैठना भी दूभर था। जहाँ बीते शुक्रवार को डिजिटल आगनबाड़ी केंद्र का शुभारंभ वही इस आंगनबाड़ी की तरफ शायद राज्य सरकार के मंत्रियों की नजर नहीं पड़ी है। जहाँ दूसरे आंगनबाड़ी केंद्र डिजिटली बदल रहे है वही यह केंद्र बदहाली से गुजर रहा है। 

छोटा पड़ जाता है कमरा 

न्यू पटेलनगर फर्स्ट स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पिछले चार साल से बदहाली से गुजर रहा है। यहाँ 30 बच्चे पंजीकृत है जबकि कई बच्चे ज्यादा भी हो जाते है लेकिन ज्यादा बच्चों के हिसाब से केंद्र का कमरा छोटा पड़ जाता है। अगर बच्चे पुरे पहुंचे तो कमरा खचाखच भर जाता है। वही सिर्फ इतना ही केंद्र का हाल यह है कार्यकर्त्ता और सहायिका को खड़े होने की जगह नहीं मिलती। वही कोरोना के चलते फिलहाल केंद्र बंद है। लेकिन बाहर से जब केंद्र की स्थिति इतनी बुरी थी तो जरा सोचिए की अंदर से क्या हालत होगी। 


किराए के लिए होती है दिक्कत 

दूसरी ओर दिक्कत यह की अगर इसे खाली करके केंद्र को स्थापित किया जाता है तो किरए की समस्या उत्पन्न होती है। वही इसी भवन में चलने वाले केंद्र को लेकर मकान मालिक किराए के लिए परेशान करता रहता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है की कभी कभी किराया हमें अपनी जेब से चुकाना पड़ता है। वही पथरीबाद में चल रहे आंगनबाड़ी की हालत ठीक है लेकिन यहाँ भी किराया समय से ना चुकाने पर कार्यकर्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।