चारधाम यात्रा नियमों पर हो संशोधन, कल होगी सुनवाई

चारधाम यात्रा में सीमित श्रद्धालुओं की संख्या के चलते कई दिनों से विरोध चल रहा है जिसमे कहा जा रहा है की ई-पास की अनिवार्यता को ख़त्म किया जाए

चारधाम यात्रा नियमों पर हो संशोधन, कल होगी सुनवाई

चारधाम यात्रा में सीमित श्रद्धालुओं की संख्या के चलते कई दिनों से विरोध चल रहा है जिसमे कहा जा रहा है की 
ई-पास की अनिवार्यता को ख़त्म किया जाए क्यूंकि इससे व्यापारियों को किसी तरह का फायदा नहीं बल्कि नुकसान उठाना पड़ रहा है। वही सोमवार आ महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर व मुख्य स्थायी अधिवक्ता (सीएससी) चन्द्रशेखर रावत द्वारा मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ में मामले की जल्द सुनवाई हेतु प्रार्थना की है। अगली सुनवाई मंगलवार को होगी। 


नियमों में करें बदलाव 

इस दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए कहा गया की चारधाम यात्रा कोरोना संक्रमण को देखते हुए निर्धारित किया गया था लेकिन वर्तमान समय में कोरोना मरीजों की संख्या पहले के मुकाबले बेहद कम है। इसलिए राज्य सरकार को चारधाम यात्रा के नियमों में संशोधन करना चाहिए। बीतों दिनों की बात की जाए यात्रा के दौरान कई श्रद्धालुओं को बिना ई-पास या फर्जी ई-पास के साथ उन्हें वापसी का रास्ता दिखाया गया है। इन पंद्रह दिनों के की बात की जाए तो चार हजार संख्या में श्रद्धालुओं को वापस किया जा चूका है। 


रोजीरोटी पर आ रहा है खतरा 

महाधिवक्ता के ओर से कहा गया है की चारधाम यात्रा को समाप्त होने में महज 40 दिन से कम का समय बचा है, इसलिए जितने भी श्रद्धालू आ रहे है, सबको दर्शन करने की अनुमति दी जाए। जो श्रद्धालु ऑन ललाइन दर्शन करने हेतु रजिस्ट्रेशन करा रहे है, वह नहीं आ रहे है जिसके कारण स्थानीय लोगों पर रोजीरोटी का खतरा मंडरा रहा है या यूँ कहे की इस चारधाम यात्रा से वयापरियों को किसी तरह से फायदा नहीं हुआ है। 

तीन या चार हजार श्रद्धालुओं को दे अनुमति 

मँगानुसार कहा जा रहा है की राज्य सरकार को श्रद्धालुओं की निर्धारित संख्या पर से रोक हटा देनी चाहिए। या फिर तीन से चार हजार श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति दी जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने पूर्व में चारधाम में प्रतिदिन केदारनाथ धाम में 800, बद्रीनाथ धाम में 1000, यमुनोत्री में 400, गंगोत्री में 600,  श्रद्धालुओ को जाने की अनुमति दी थी।