चार साल बाद मिला विवाहित मृतिका को इंसाफ, भाइयों को मिली मौत की सजा, प्रेम विवाह से थे नाराज

चार साल पुराने मामले में एडीजे कोर्ट ने विवाहिता के हत्यारे भाइयों को मौत की सजा सुना दी। चार साल बाद विवाहित मृतिका को इन्साफ मिला

चार साल बाद मिला विवाहित मृतिका को इंसाफ, भाइयों को मिली मौत की सजा, प्रेम विवाह से थे नाराज
चार साल पुराने मामले में एडीजे कोर्ट ने विवाहिता के हत्यारे भाइयों को मौत की सजा सुना दी। चार साल बाद विवाहित मृतिका को इन्साफ मिला। वही हत्या के पीछे का कारण सिर्फ प्रेम विवाह था। इस प्रेम विवाह से नाराज दो रिश्तेदारों और एक चहेरे भाई ने अपनी विवाहित बहिन की हत्या कर दी। मृतिका के प्रेम विवाह से सिर्फ उसके भाई ही नहीं उसके माता पिता भी इतने नाराज थे की उन्होंने अपनी बेटी की हत्या के षड़यंत्र में शमिल हो गए। हालाकिं इस प्रेम विवाह को तीन साल हो गए थे भाइयों ने तीन साल बाद अपनी बहन को माता पिता से सुलह के बहाने अपने मामा के घर बुलाया जिसके बाद गड़ासे से उसका गला काटकर उसे मौत के घाट उतार दिया। 

लक्सर एडीजे कोर्ट के शासकीय अधिवक्ता भूपेश्वर ठकराल ने बताया कि खानपुर थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव निवासी नेपाल सिंह की पुत्री प्रीति ने वर्ष 2014 में पड़ोसी गांव धरमपुर निवासी ब्रजमोहन से शादी की थी। इस बात से उनके परिजन नाराज थे। परिजनों की नाराजगी के चलते विवाहिता का मायका आना जाना बंद था। 18 मई 2018 को, उसके भाइयों ने प्रीति को उसके माता-पिता से सुलह करने के बहाने उसके मामा के घर खानपुर के आब्दीपुर गाँव में बुलाया। प्रीति के सगे भाई कुलदीप, अरुण और चचेरे भाई राहुल, जो पहले से ही घात लगाकर बैठे थे। वही मौके का फायदा उठाते हुए भाइयों ने प्रीति की हत्या कर दी। बृजमोहन ने चार लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के दौरान कुलदीप, राहुल और अरुण को जेल भेज दिया था। 

चौथे आरोपी का नाम मुकदमे से हटा दिया गया। पुलिस ने जांच के बाद इन तीनों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भेजी थी। इसके बाद से लक्सर के एडीजे कोर्ट में इसकी सुनवाई चल रही थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने पुलिस, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर समेत कुल 15 गवाह पेश किए थे। सुनवाई के बाद लक्सर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने इस हत्याकांड को दुर्लभतम से दुर्लभतम मानते हुए तीनों आरोपियों को मौत की सजा सुनाई। अधिवक्ता ठकराल ने बताया कि तीनों को जेल भेज दिया गया है. फांसी की तारीख अभी तय नहीं हुई है। इस दौरान वे चाहें तो फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं।