आखिर क्यों ठप हुई इंदिरा अम्मा भोजनालय योजना, कांग्रेस सरकार में हुई थी शुरुआत

साल 2015 में शुरू हुई इंदिरा अम्मा थाली अब राजधानी देहरादून में ठप होती नजर आ रही है।

आखिर क्यों ठप हुई इंदिरा अम्मा भोजनालय योजना, कांग्रेस सरकार में हुई थी शुरुआत

साल 2015 में शुरू हुई इंदिरा अम्मा थाली अब राजधानी देहरादून में ठप होती नजर आ रही है। हालात यह है की नगर निगम क्षेत्र में इस योजना के तहत बने पांच इंदिरा अम्मा भोजनालयों (कैंटीन) में से दून अस्पताल में बनी एक कैंटीन को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। वहीं, चार अन्य सब्सिडी वाली कैंटीन चलाने में संचालकों को परेशानी हो रही है। इस योजना की शुरुआत साल 15 अगस्त 2015 में कांग्रेस के पूर्व सीएम हरीश सिंह रावत के समय में शुरू ही थी। 

उस समय इंदिरा अम्मा भोजनालय का मूल्य महज बीस रुपये हुआ करता था। वही इसमें दस रुपये सब्सिडी के रूप में कैंटीन संचालक के खाते में जाता था। देहरादून नगर निगम क्षेत्र के घंटाघर स्थित एमडीडीए कॉम्प्लेक्स, सचिवालय, आईएसबीटी ट्रांसपोर्ट नगर, विकास भवन सर्वे चौक और दून अस्पताल में इंदिरा अम्मा कैंटीन शुरू की गई थी। वही कैंटीनों के संचालन की जिम्मेदारी महिला सहायता समूह को सौपी गई थी। उस शुरूआती समय में इंदिरा अम्मा थाली कैंटीन के बाहर लाइन लगी होती थी और कम समय में अम्मा थाली देहरादून में लोकप्रिय हो गई। वही इस बीस रुपये की थाली की खासियत थी की इसमें चार रोटी, चावल, दाल और सब्जी, चटनी और अचार। 

ठप पड़ने का क्या है कारण 

भाजपा की सरकार के आते ही इंदिरा अम्मा थाली मुश्किल में आ गई। कुछ महीने बाद, विभिन्न कैंटीनों को निविदाओं के माध्यम से अन्य एसएचजी को सौंप दिया गया। अनुदानित बजट समय पर नहीं मिलने से कैंटीन संचालकों को कैंटीन चलाना मुश्किल हो रहा है। संचालकों का कहना है कि कोरोना काल के बाद और बढ़ती महंगाई के चलते अब 20 रुपये में थाली देना मुश्किल हो रहा है। दून अस्पताल की कैंटीन कोरोना काल से पहले ही बंद थी, अब उसकी जगह एक दुकान बन गई है। 

एमडीडीए कॉम्प्लेक्स घंटाघर, विकास भवन और ट्रांसपोर्ट नगर आईएसबीटी में भी ग्राहक कम मिल रहे हैं। कोरोना के बाद से ग्राहकों की संख्या कम हो गई है। अब कमर्शियल सिलेंडर, खाने-पीने और अन्य चीजों के दाम बढ़ने से 20 रुपये प्रति प्लेट पर कैंटीन चलाना मुश्किल होता जा रहा है. वहीं सचिवालय स्थित कैंटीन की निदेशक सीमा ने बताया कि कैंटीन शुरू से ही बिना सब्सिडी के चल रही हैं। पहले यह 30 रुपये प्रति प्लेट था, अब महंगाई बढ़ने के कारण इसे बढ़ाकर 40 रुपये प्रति प्लेट कर दिया गया है।
-धारा कैंटीन संचालक फरजाना