अनसुने किस्से: आखिर किस वजह से आशा पारेख ने छोड़ी थी इंडस्ट्री, नासिर हुसैन से करती थी प्यार

मशहूर वेटरेन एक्ट्रेस आशा पारेख को भला कौन भूल सकता है। 1959 में शम्मी कपूर के साथ दिल देके देखो से डेब्यू करने वाली आशा पारेख ने अपने अभिनय की शुरुआत की थी

अनसुने किस्से: आखिर किस वजह से आशा पारेख ने छोड़ी थी इंडस्ट्री, नासिर हुसैन से करती थी प्यार
मशहूर वेटरेन एक्ट्रेस आशा पारेख को भला कौन भूल सकता है। 1959 में शम्मी कपूर के साथ दिल देके देखो से डेब्यू करने वाली आशा पारेख ने अपने अभिनय की शुरुआत की थी। लाखों दिलों पर राज करने वाली आशा ने कभी विवाह नहीं किया। आशा पारेख एक बाल कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया था जैसे माँ (1952) और बाप बेटी (1954) में अभिनय किया था। आशा और अमिताभ ने टीनू आनंद द्वारा लिखित और निर्देशित एक्शन थ्रिलर कालिया (1981) में एक साथ अभिनय किया। 

फिल्म में परवीन बाबी, कादर खान, प्राण, अमजद खान सहित अन्य कलाकार भी थे। लेकिन जैसे जैसे आशा जी की उम्र बढ़ती गई आशा जी के पास काम आना कम होता गया। बढ़ती उम्र के हिसाब से आशा को सेकंड रोल मिलता या माँ की भूमिका निभाने का किरदार मिलता। अपने एक पुराने इंटरव्यू में आशा पारेख ने खुलासा किया था की मुझे माँ का किरदार निभाना बिल्कुल पसंद नहीं था। लेकिन एक बार मैंने इस किरदार को काम की कमी के चलते हां बोल दिया। आशा जी को सेट पर तय समय के हिसाब से सुबह 9:30 पहुंचना होता था लेकिन उसी जगह फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता शॉट देने के लिए शाम 6:30 बजे आते थे। इस तरह के टॉर्चर से ऊब कर आशा जी ने इंडस्ट्री छोड़ने का फैसला ले लिया। 

आशा जी ने कहा यह फैसला मेरे लिए एक कठिन निर्णय था लेकिन में जीवन व्यक्ति को हर तरह की चुनौती का सामना करना पड़ता है यह उनमे से एक था। आशा का कहना था की मैं बूढी हो रही थी इस बात को मैंने स्वीकार किया। आशा ने अपने पूरे करियर में जब प्यार किसी से होता है (1961), तीसरी मंजिल और दो बदन (1966), कटी पतंग (1970), कारवां (1971), और मैं तुलसी तेरे आंगन की (1978) जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया। अन्य। 90 के दशक में आशा ने कम फिल्मों में काम किया। उन्हें प्रोफेसर की पड़ोसन और भाग्यवान (1993), घर की इज्जत (1994) और आंदोलन (1995) में देखा गया था। 

अभिनय छोड़ने के बाद, आशा को गुजराती धारावाहिक ज्योति के साथ एक टेलीविजन निर्देशक बन गईं। अपनी प्रोडक्शन कंपनी, आकृति के तहत, आशा ने पलाश के फूल, बाजे पायल, कोरा कागज़ और दाल में काला जैसे धारावाहिकों का निर्माण किया। 2008 में, वह 9X पर रियलिटी शो त्योहार धमाका में जज थीं। बात करें उनके आजीवन अविहावित रहने की तो उनका कहना था उन्होंने कभी भी शादी के बारे में नहीं सोचा उन्हें ऐसा कोई दिखा ही नहीं जिससे वह प्यार कर सके। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था उनके माता पिता की शादी अंतर्जातीय विवाह था। 

लेकिन उन्होंने कभी अपने माता पिता की शादी में किसी तरह की परेशानी नहीं देखी। लेकिन आशा पारेख द्वारा लिखी हुई किताब "द हिट गर्ल" में लिखा है वह डायरेक्टर नासिर हुसैन से प्यार करती थी। नासिर हुसैन पहले से शादी शुदा थे और इस बात को जानते हुए आशा अपने जज्बात काबू में न रख सकी। आशा जी का मानना था की वह किसी का घर तोड़ने में विश्वास नहीं रखती हालाकिं आशा जी की माँ ने इस रिश्ते के लिए मंजूरी दे दी थी लेकिन आशा ऐसे किसी रिश्ते में बंधना नहीं चाहती थी।