उत्तराखंड में करीब डेढ़ लाख बंदर और लंगूर, हरिद्वार में बंदरों की संख्या सबसे अधिक

उत्तराखंड में बंदरों का उत्पाद कम नहीं हुआ है और ऐसे में लगभग 6 साल बाद बंदरों और लंगूरों पर शोध किया गया है

उत्तराखंड में करीब डेढ़ लाख बंदर और लंगूर, हरिद्वार में बंदरों की संख्या सबसे अधिक

उत्तराखंड में बंदरों का उत्पाद कम नहीं हुआ है और ऐसे में लगभग 6 साल बाद बंदरों और लंगूरों पर शोध किया गया है जिसमे जारी हुए आंकड़े उत्तराखंड में करीब डेढ़ लाख बंदर और लंगूर हैं। इनमें एक लाख दस हजार से अधिक बंदर और 37,735 लंगूर हैं। गुरुवार को वन विभाग के वन्यजीव विभाग ने इनके आंकड़े जारी किए है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने वन मुख्यालय में इन आंकड़ों को सार्वजनिक करते हुए कहा कि उत्तराखंड में करीब डेढ़ लाख बंदर और लंगूर हैं। हरिद्वार में बंदरों की संख्या सबसे अधिक है। वन विभाग को अपने सर्वे में हरिद्वार में 6,857 बंदर मिले। 


इसी तरह अगर हम सबसे ज्यादा लंगूरों की बात करें तो रामनगर स्थित कॉर्बेट नेशनल पार्क में इनकी संख्या करीब 3219 है। इतना ही नहीं पिथौरागढ़ वनमंडल के धारचूला, अस्कोट और मुनस्यारी रेंज में भी काला बंदर पाया गया। उत्तराखंड में बंदरों और लंगूरों का मूल्यांकन पहले 2015 में किया गया था। यह सुखद आंकड़ा माना जाता है कि 2015 की तुलना में बंदरों की संख्या में 24 प्रतिशत और लंगूरों की संख्या में 31 प्रतिशत की कमी आई है। बंदरों और लंगूरों की घटना क्यों है अच्छी खबर? इन आंकड़ों को सुखद भी कहा जा सकता है क्योंकि उत्तराखंड में बंदर और लंगूर की खेती कृषि के लिए एक बड़ी समस्या रही है। 


गांवों से बड़े पैमाने पर पलायन के पीछे बंदरों का आतंक भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। बंदरों के झुंड खेतों में पहुंचकर फसलों को नष्ट कर देते हैं। इसके अलावा अल्मोड़ा, ऋषिकेश, मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों पर बंदरों का आतंक बड़ी समस्या रहा है। वन विभाग ने बंदरों की नसबंदी के लिए भी कार्यक्रम चलाए, लेकिन ये नाकामयाबी साबित हुए। उत्तराखंड वन विभाग के मुख्य वन्यजीव वार्डन पराग मधुकर धाकाटे के अनुसार 20 से 24 दिसंबर 2021 के बीच राज्य भर में बंदरों और लंगूरों का आकलन किया गया. यह सर्वे राज्य के 31 वन संभागों में 1950 के वन बीट्स में किया गया था, जिसमें 1780 वन कर्मियों को लगाया गया था। इसमें भारतीय वन्यजीव संस्थान ने तकनीकी सहयोग दिया।