मुफ्त बिजली की मांग को लेकर 'आप' कार्यकर्ताओं का सीएम आवास में जमकर किया बवाल

उत्तराखंड में मुफ्त बिजली की मांग को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही शनिवार आज मुख्यमंत्री आवास में जमकर बवाल व हल्ला बोला

मुफ्त बिजली की मांग को लेकर 'आप' कार्यकर्ताओं का सीएम आवास में जमकर किया बवाल

उत्तराखंड में मुफ्त बिजली की मांग को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है वहीं आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने शनिवार आज मुख्यमंत्री आवास में जमकर बवाल व हल्ला बोला.कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस कर्मियों की फ़ोर्स इस दौरान तैनात रही. इस दौरान जहां पुलिस फ़ोर्स कार्यकर्ताओं को रोकने का प्रयास कर रही थी वही दूसरी तरफ पुलिस फ़ोर्स व कार्यकर्ताओं के बीच धक्का मुक्की और तीखी बहस छिड़ गई.  


प्रदर्शन के दौरान पुलिस फ़ोर्स के साथ बतमीजी और उत्पाद के चलते अध्यक्ष एसएस कलेर,  कर्नल अजय कोठियाल सहित कई आप कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। आप कार्यकर्ताओं ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश के पर्वतीय जिलों में ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। वही जब हारी संख्या में कार्यकर्त्ता काफिले के ओर चल रहे थे उस वक़्त तैनात पुलिस फ़ोर्स ने कार्यकर्ताओं को हाथीबड़कला में ही रोक लिया गया था.


वही इस दौरान हाथीबड़कला में कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन भर से ट्रैफिक जाम लग गया था साथ ही रोके जाने से नाराज आप कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर प्रदर्शन करते हुए आप कार्यकर्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में जनता कांग्रेस और भाजपा सरकारों के झूठे वादों से परेशान हो चुकी है। कहा कि विकास के नाम पर उत्तराखंड में पिछले 20 सालों में कुछ भी नहीं हुआ है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने 100 यूनिट बिजली मुफ्त देने का झूठा वादा किया है और अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पलट गए हैं.

 

प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर, वरिष्ठ नेता रविंद्र जुब्रान, प्रदेश प्रवक्ता उमा सिसोदिया, रविंद्र आनंद, संजय भट्ट समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पुलिस से  उलझते रहे।  प्रदर्शनकारियों की भीड़ को देखते हुए देहरादून पुलिस ने भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था। कार्यकर्ताओं और पुलिस बल के बीच जमकर धक्क-मुक्की हुई। आप कार्यकर्ता सीएम आवास जाने की जिद करते रहे लेकिन मौके पर तैनात भारी पुलिसबल ने उनकी एक न सुनी और प्रदर्शनकारियों को आगे जाने से रोक दिया गया.