पुलिस विभाग के बिना अनुमति से चला रहे थे ट्रस्ट दम्पंती के ऊपर हुआ मुकदमा दर्ज

अब साइबर क्राइम के बाद पुलिस के हथे लगे दम्पंती बिना अनुमति के चला रहे थे उत्तराखंड पुलिस फैमिली वेलफेयर नाम से ट्रस्ट

पुलिस विभाग के बिना अनुमति से चला रहे थे ट्रस्ट दम्पंती के ऊपर हुआ मुकदमा दर्ज

देहरादून पुलिस के नाम और पहचान के आधार पर लगातार अपराध होते जा रहे है। वहीं अब साइबर क्राइम के बाद पुलिस के हथे एक दम्पंती लगे है जो बिना पुलिस विभागीय के अनुमति से उत्तराखंड पुलिस फैमिली वेलफेयर नाम से ट्रस्ट चला रहे थे। सिर्फ इतना ही नहीं बिना अनुमति होने के कारण सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ट्रस्ट का प्रचार प्रसार भी किया जा रहा था साथ ही इस ट्रस्ट में पुलिस मोनोग्राम का इस्तेमाल हो रहा था। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के निर्देश पर सोमवार को आरोपितों के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। 


पुलिस महानिरीक्षक वी. मुरुगेशन ने बताया की उन्हें इस बात की खबर उन्हें सोशल मीडिया से मालूम चली। उन्हें ट्रस्ट के संज्ञान में लेते हुए शक के आधार पर 29 मई को स्पेशल टास्क फोर्स के एसएसपी अजय सिंह को पत्र लिखकर ट्रस्ट की जांच का आदेश दिया। जिसमे पता चला की ट्रस्ट का संस्थापक शैलेश सिंघल कांवली रोड का निवासी है। उसने विभाग से बिना अनुमति लिए ट्रस्ट को उत्तराखंड पुलिस के नाम से पंजीकृत कराया है। साथ ही इसका फेसबुक पर प्रचार-प्रसार किया। शैलेंद्र ने पत्नी नीलम सिंघल को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बनाया।  

जांच में यह भी पता चला कि इन तीनों ने धोखाधड़ी करने और अनुचित लाभ लेने के उद्देश्य से ट्रस्ट बनाया था। नगर कोतवाल रितेश शाह ने बताया कि शैलेंद्र, नीलम और दीपक के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। शैलेंद्र सिंघल फार्मेसी चलाता है। नगर कोतवाली के एसएसआइ लोकेंद्र बहुगुणा ने बताया कि अगर कोई संस्था पुलिस के नाम पर ट्रस्ट बनाती है तो रजिस्ट्रार कार्यालय से इसकी सूचना पुलिस विभाग को दी जानी चाहिए। इस प्रकरण में रजिस्ट्रार कार्यालय में ट्रस्ट को पंजीकृत करने वाले की भूमिका की भी जांच की जाएगी।