इस ऐतिहासिक यात्रा में तीर्थयात्रियों के अलावा घोड़ों और खच्चरों ने भी तोड़ा दम, 25 खच्चरों की मौत

चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले सीएम धामी ने कई बार कहा था की इस बार की चारधाम यात्रा ऐतिहासिक होगी लेकिन ऐसी होगी यह खुद जान गवाने वाले तीर्थयात्रियों ने भी नहीं सोचा था।

इस ऐतिहासिक यात्रा में तीर्थयात्रियों के अलावा घोड़ों और खच्चरों ने भी तोड़ा दम, 25 खच्चरों की मौत

चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले सीएम धामी ने कई बार कहा था की इस बार की चारधाम यात्रा ऐतिहासिक होगी लेकिन ऐसी होगी यह खुद जान गवाने वाले तीर्थयात्रियों ने भी नहीं सोचा था। चारधाम यात्रा में रोजाना एक तीर्थयात्री को मौत का सामना करना पड़ रहा है। वही इन मौतों का आकड़ा अब 28 तक पहुँच चूका है। लेकिन दुःख इस बात का भी है की इस ऐतिहासिक यात्रा में बुजुर्गों के आलावा जानवरों ने भी दम तोड़ना शुरू कर दिया है। 

इस यात्रा के दौरान अब तक 25 खच्चरों की जान जा चुकी है। घोड़ों और खच्चरों की मौत से संचालक दहशत में हैं। वहीं पशु चिकित्सा अधिकारी क्षमता से अधिक काम को पशुओं की मौत का कारण बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले 10 दिनों में 10 घोड़े खच्चरों की भी सड़क पर मौत हो चुकी है. स्थानीय निवासी और खच्चर संचालक इन मौतों का कारण यमुनोत्री धाम के दुर्गम वैकल्पिक मार्ग को बता रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ स्वास्थ  महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुणा का कहना है की ज्यादातर मौतें पैदल चलने से हो रही है। 

मौत का कारण हार्ट अटैक व अन्य बीमारियां रही हैं। अस्पतालों में किसी यात्री की मौत नहीं हुई है। चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित अस्पतालों और चिकित्सा शिविरों में सभी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों की रिपोर्ट के अनुसार, 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के अलावा कम उम्र के लोगों की भी मौत हो रही है। 


13, 50 से 60 आयु वर्ग में सात मौतें 
40 से 50 आयु वर्ग में चार मौतें 
30 वर्ष के आयु वर्ग में तीन लोगों की मौत


नरेंद्र मोदी सेना के अध्यक्ष संदीप राणा, जानकीचट्टी नारायणपुरी के पूर्व प्रमुख जगत सिंह रावत, महावीर पंवार का कहना है कि भिडियाली गढ़ से यमुनोत्री धाम तक वैकल्पिक मार्ग मानकों के अनुरूप नहीं है। जिला पंचायत द्वारा सड़क पर पानी आदि की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे घोड़े और खच्चर मर रहे हैं। घोड़ा खच्चर संचालकों को मुआवजा देने की मांग जिला पंचायत से भी की गई है। वहीं जानकीचट्टी में तैनात पशु चिकित्सा अधिकारी अभिनाश ने खच्चरों की मौत का कारण अधिक काम करना बताया है। 


उनके अनुसार घोड़ों को अधिक काम करने और बहुत ठंडा पानी पीने से पेट का दर्द (पेट दर्द) की बीमारी हो गई है, जिससे उनकी मौत हो गई है। डॉ. अभिनाश ने बताया कि उन्हें अब तक तीन खच्चरों की मौत की सूचना मिली है। वहीं 6 मई से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा में इस साल 8000 से अधिक घोड़े और खच्चरों का पंजीकरण हो चुका है. यात्रियों के बढ़ते दबाव के साथ ही गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर घोड़े और खच्चरों की मौत के मामले भी सामने आने लगे हैं। गुरुवार को गौरीकुंड में 3 और सोनप्रयाग में 1 घोड़े और खच्चरों की मौत हो गई. मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष रावत ने बताया कि अब तक 15 घोड़ों और खच्चरों की मौत हो चुकी है। 


उन्होंने जानवरों की मौत के लिए अत्यधिक थकान और पानी की कमी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि संचालक घोड़े और खच्चरों से अत्यधिक काम ले रहे हैं और खाने को सूखा भूसा और चना दे रहे हैं. पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है, जिससे फेफड़ों की झिल्लियों पर दबाव पड़ने से पशुओं की मौत हो रही है। यमुनोत्री वॉकवे पर घोड़ों के लिए गर्म पानी उपलब्ध कराने के लिए पानी की टंकियों पर हीटर लगाए गए थे, लेकिन ये हीटर बिजली से नहीं जुड़े हैं। अधिकांश हीटर भी खराब हो गए हैं। अगर घोड़ों को रास्ते में गर्म पानी मिल जाए तो उन्हें बीमारी से बचाया जा सकता है।